सदर अस्पताल मधुबनी
सदर अस्पताल मधुबनी में आप जिंदगी नही मौत के करीब चले जाते है ! सदर अस्पताल का सच किसी भयावह स्थिति से कम नही आपको पता है सदर अस्पताल मधुबनी आईएसओ ISO द्वारा प्राप्त अस्पताल है ! यहाँ न समुचित इलाज की व्यवस्था है न ही एम्बुलेंस की सुविधाएं बस रेफर और रेफर की जोरदार व्यवस्था की जाती है ! दूसरे सीरीज में आपने पढ़ा था कि यहां मरीजों को बाहर के लड़के इलाज करते है ! और ऑक्सीजन मास्क न होते हुए मरीजों को नाक में ही आक्सीजन पाइप घुसिया देते है ! अभी तो ये पता चला है कि एम्बुलेंस ड्राइवर से ही मरीजों को सुई डलवाया जाता है ! अब दूर दराज से आये मरीजों को क्या पता कि वो कम्पाउंडर है कि ड्राइवर ?
अभी हाल ही में ये पता चला कि सदर अस्पताल मधुबनी में दिन रात मिलाकर चौबीस घँटा नही छतीस घँटे का दिन रात होता है ! और उस हिसाब से जनरेटर चलने का बिल बना था ! और पैसे की अस्पताल प्रबंधन और प्रशासन प्रबंधन में घपले किया गया ! जबकि करोड़ रुपये की सोलर प्लांट लगाई गई है ! जिसे जानबूझकर खराब होने की लीपापोती किया गया ! पचहत्तर लाख से करोड़ रुपये का गबन हो गया और जिला प्रशासन चुप है ! क्या पता उसे भी चढ़ावा चढ़ाया गया हो ? आखिर ये सिस्टम इतना भरस्टाचारियों के कब्जे में कैसे है ? कभी सोचा है इन विषयों पर आपने ? ये इसलिए है क्योंकि हम आप सभी चुप है खामोश है जैसे तैसे वाला जिंदगी जी रहे है ! इसलिए ये गोरखधंधा सदर अस्पताल में खेला जा रहा है !
आप सदर अस्पताल घूमकर आइये बीमार नही पड़ गए तो कहना ओपीडी के बगल में कचड़ा कीचड़ और उसमें फेका गया मरीजों का खून से सना कपड़े जिसपर भीनभीनाती मच्छरों का जुलूस कई तरह की बीमारियों का जन्मस्थली बना सदर अस्पताल आपको ठीक करके नही और बीमार कर घर भेज देगी ओह सॉरी रेफर कर देगी भैया हम इलाज कराने ठीक होने स्वस्थ होने सदर अस्पताल आते है बीमार होने नही ! मगर अस्पताल प्रबंधन को इससे कोई मतलब नही उसे बस मतलब है रेफर करने से या किसी के निजी अस्पताल में भेजने से इस सब काम के लिए वहां निजी अस्पताल के दलाल डेरा डाले हुए खड़े रहते है !

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