राधिका मदन और सैन्य मल्होत्रा एक साथ ''पटाखा'' में
कलाकारों को किरदारों की स्किन में जाने के लिए तरह-तरह की अग्निपरीक्षाओं से गुजरना पड़ता है। राधिका मदान ओर दंगल गर्ल सान्या मल्होत्रा को अपने रोल्स के लिए अलग तरह के लिटमस टेस्ट से गुजरना पड़ा। विशाल भारद्वाज की फिल्म ‘पटाखा’ में वे राजस्थान के दूर-दराज के गांव की बहनें बनी हैं। उनकी स्किन में जाने के लिए उन्हें गाय दूहने से लेकर गोबरों के उपले व गोल रोटियां बनाने के तरीकों से गुजरना पड़ा। खुद राधिका के शब्दों में, ‘मैं ऐसे माहौल में बड़ी हुई हूं, जहां रोटी बनाना तो दूर किचेन तक में मैंने कदम नहीं रखे थे। पर इस किरदार के लिए लकड़ी की आंच पर खाने बनाए। गोल रोटी बनाना भी किरदार के करीब आने का तरीका था। इस काम में सान्या मल्होत्रा ने मेरा साथ पेशेंसली दिया। पहले दिन तो एक टमाटर काटने में मुझे 40 मिनट लगे थे, पर सेट पर लोग इरीटेट नहीं हुए। पहले दिन जो मेरे हाथों की जिंदगी की पहली रोटी बनी, उसे तो कुत्ते को खिलवा दिया गया। अपने हाथों से गोल रोटी बनने में मुझे तीन दिन लगे। शूट के आखिरी दिन तक मैं खाना बनाने में पारंगत हो गई थी। रैप अप वाले दिन मैंने अपने हाथों की बनी पूड़ी-सब्जी सबको खिलाई थी।’
सान्या ने एक और चीज की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा, ‘हमने किरदारों के लिए वेट भी पुट ऑन किया। वह भी 10-10 किलो। उस शेप में हम दोनों आपस में लड़ा करते थे। पहले तो लगा था कि वेट बढ़ाने से हम क्या अचीव कर लेंगे। पर उस स्टेज में आने पर खुद में बदलाव महसूस करने लगे थे। सुस्ती रहती थी और मूवमेंट स्लो रहती थी। वह चीज हमारे किरदारों की शादी के बाद वाली सिचुएशन में काम आई। देखा जाए तो इन सब चीजों ने हमें अपने-अपने किरदारों के काफी पास पहुंचा दिया।

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