मल्टीप्लेक्स ऑडिएंस को हर तरह की फिल्में पसंद

30 फीसदी अकेले कमाकर देता है मुंबई सर्किट, 20 प्रतिशत से ज्यादा दिल्ली सर्किट
-15 से ज्यादा फीसदी कमाई ईस्ट पंजाब सर्किट और ईस्टर्न सर्किट से होती है
-मल्टीप्लेक्स ऑडिएंस को हर तरह की फिल्में पसंद
-छोटे शहरों और गांवों के सिंगल स्क्रीन्स में आज भी एक्शन और रोमांटिक फिल्मों का जलवा
-हिंदी फिल्मों के लिहाज से देशभर में कुल 935 मल्टीप्लेक्स, 3,027 मल्टीप्लेक्स स्क्रीन, 1,669 सिंगल स्क्रीन यानी कुल 4,696 स्क्रीन काउंट
-वैसे बाकी भाषाओं को मिलाकर 8,000 से ज्यादा स्क्रीन काउंट
शारिक पटेल कमर्शियल फिल्मों की बेसिक डिजायनिंग के बारे में बताते हैं। वे कहते हैं, ‘जिन फिल्मों को रिलीज ही 4,000 से ज्यादा स्क्रीन पर करना हो, उनमें स्टार्स की मौजूदगी से लेकर ज्यादा स्क्रीन काउंट वाले शहरों की ऑडिएंस की पसंद-नापसंद और एक्सपोजर का ख्याल मोटे तौर पर रखा जाता है। अल्टीमेटली मगर फिल्म अच्छी हो तो ही वह चलती है। चाहे उसमें स्टार्स हों या न हों। छोटे शहरों और गांवों में आज भी एक्शन जॉनर पसंदीदा बना हुआ है। खान तिकड़ी और ऋतिक रौशन, अक्षय कुमार, जॉन अब्राहम की पैन इंडिया डिमांड है। वरुण धवन और टाइगर श्रॉफ ने मल्टीप्लेक्स और सिंगल स्क्रीन्स यानी गांवों में भी अपनी पैठ बड़ी गहरी कर ली है। राजकुमार राव और आयुष्मान खुराना पर भी बतौर सोलो हीरो दांव लग रहे हैं। हीरोइनों की बात करें तो कंगना रनोट, दीपिका पादुकोण और आलिया भट्ट समान रूप से बड़े और छोटे शहरों के दर्शकों की पसंद बनी हुई हैं। सिर्फ उनके कंधे पर भी फिल्में बन और बिक रही हैं।
शारिक आगे बताते हैं, ‘अलबत्ता अब जो आगे एक जॉनर प्रयोग में लाया जा सकता है, वह ‘फास्ट एंड फ्युरियस’ जैसा होगा। वह यह कि फिल्मों में चेहरे नए, पर एक्शन का स्केल बड़ा ऊंचा। उसका जब पहला पार्ट आया था तब विन डीजल और बाकी लोग उतने पॉपुलर नहीं थे, जितने अब हैं।

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