“हत्या कर अपना बदला पूरा किया”,वहीं पुत्री देंगी मुखाग्नि।


कुख्यात संतोष झा के हत्या के आरोपित का बयान “हत्या कर अपना बदला पूरा किया”,वहीं पुत्री देंगी मुखाग्नि।
बिहार सीतामढ़ी कोर्ट कैंपस में विगत 28 अगस्त को पेशी से वापसी के दौरान मारे गए कुख्यात संतोष झा के मामले ने नया मोर ले लिया है। संतोष झा का हत्या कर भागने के क्रम में पकड़ा गया अपराधी विकास मोतिहारी का रहने वाला है। प्रथम दृष्टया विकास स्वयं को विकास झा व अपने पिता गौरीशंकर झा की हत्या का बदला लेने की बात बताकर पुलिस को बरगलाता रहा। सीतामढ़ी पुलिस को अब विकास का संबंध मुकेश पाठक से होता दिख रहा है। शक है कि संतोष झा की हत्या मुकेश पाठक के कहने पर ही की गई है।
मुकेश पाठक का नाम अपराध की दुनिया में संतोष झा गिरोह से हुआ था। मुकेश पाठक को शार्प शूटर संतोष झा ने ही बनाया था। संतोष झा जब गिरफ्तार होकर जेल चला गया था, तो बाहर गिरोह की कमान मुकेश पाठक के पास ही थी। सन 2016 में मुकेश पाठक ने दरभंगा में सड़क निर्माण करा रही बड़ी कंपनी के दो इंजीनियरों की हत्या कर बिहार ही नहीं, देश भर में सनसनी पैदा कर दी थी। इस मामले में एसटीएफ ने मुकेश पाठक को गिरफ्तार किया था। मुकेश पाठक ने जेल के भीतर ही शादी रचाई थी।
पिछले एक वर्ष में संतोष झा और मुकेश पाठक के बीच तनातनी की स्थिति थी। संतोष झा की हत्या करने में जिन हत्यारों की पहचान हुई है, वह तीनों अपराधी मोतिहारी से ही आये थे।
हत्या के बाद भागने में सफल रहे दूसरे अपराधी का नाम आर्यन उर्फ़ शकील बताया गया है। यह भी मोतिहारी का है। विकास और मुकेश पाठक के घर कुछ ही किलोमीटर पर हैं।
पुलिस विकास से पूछताछ कर रही है. विकास के बारे में पुलिस ने अभी ज्यादा कोई जानकारी नहीं दी गई है. लेकिन खबरों के अनुसार विकास का कहना है कि उसने संतोष झा की हत्या कर अपना बदला पूरा किया है. उसने अपने पिता की हत्या का बदला लिया है. मामला क्या है यह पुलिस की जांच और विकास से पूरी पूछताछ के बाद ही साफ होगा. विकास के पास से एक पिस्टल और एक लोडेड मैगजीन भी बरामद किया गया है.
आपको बता दें कि संतोष झा पिपुल्स लिबरेशन आर्मी नाम से एक गिरोह बना रखा था. जो हत्या, अपहरण, लूट और रंगदारी जैसे अपराधों को अंजाम देने का काम करती थी. संतोष झा बिहार सरकार के लिए भी बड़ा सिर दर्द बनी हुई थी. संतोष झा पर कुल 32 मामले दर्ज थे. हालांकि संतोझ झा जेल में बंद था लेकिन फिर भी उसका गिरोह बिहार में काफी सक्रिय था.
संतोष झा अपने गुर्गों की मदद से अपराध को अंजाम दे रहा था. इसके लिए उसने कई लोगों की बहाली कर रखी थी. अपने गुर्गों को वह हर महीने पगार देता था. पुलिस सूत्रों के मुताबिक संतोष झा के गैंग में करीब चार दर्जन लड़के शामिल थे.
संतोष झा सुर्खियों में तब ज्यादा आया था जब उसने दरभंगा में 2 इंजिनियरों की हत्या कर दी थी. संतोष झा के साथ उसका साथी मुकेश पाठक रोड कंस्ट्रक्शन और दूसरे बड़ी कंपनियों के लिए आतंक का पर्याय बना हुआ था.
कुख्यात संतोष झा का आज शाम 3 बजे होगा अंतिम संस्कार। देर शाम पैतृक गांव दोस्तिया लाया गया शव। पिपराही और पुरनहिया थाने की पुलिस दोस्तिया गांव में कर रही है कैम्प। संतोष की बड़ी पुत्री देंगी मुखाग्नि।

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